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ब्लॉग्स (2)
मस्जिदों-मन्दिरों की दुनिया में मुझको पहचानते कहाँ हैं लोग रोज़ मैं चाँद बनके आता हूँ दिन में सूरज सा जगमगाता हूँ खनखनाता हूँ माँ के गहनों में हँसता रहता हूँ छुप के बहनों में मैं ही मज़दूर के पसीने में !!!! मैं ही बरसात के महीने में मेरी तस्वीर आँख का आँसू ... आगे पढ़ें...

मैं ईश्वरमैं मनुष्य के रूप में ईश्वरमैं उस पत्थर की मूरत में ईश्वर मैं निराकार में ईश्वरमैं तुम्हारी सूरत में ईश्वर बस तुम मुझे पुकारो अपनी आँखें बंद किएइतनी श्रद्धा से, इतनी शिद्दत से कि तुम आँखें खोलो और मुँह से तुम्हारे ही, ये निकले बोलो वत्स क्यों ... आगे पढ़ें...