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ब्लॉग्स (2)
जीवन एक मंथन सा हो चला हैजहाँ से पहले विष ही निकलता हैअमृत निकलने का विश्वास भी हैप्रतीक्षा है तो उस प्रभु कीजो फिर मोहिनी के रूप मेंअंदर के राक्षस को विष पिला देऔर अंदर के देवता को अमरता का वरदान मिले...... चिंता है तो बस इस बात कीकि क़िस्मत के राहू केतु ... आगे पढ़ें...

...जैसे दुनिया-सी हो चली थी, अहम और नफरत की आग में जलती हुई.....तभी एक हाथ मेरी आँखों के अंधेरे को चीरता हुआ करीब आया और कहने लगा, आ तुझे तेरी रोशनी का शहर दिखाऊँ जहाँ पिछले जनम में तू घर-घर जाकर उम्मीद के दीये जलाकर आई थी। वहाँ हर घर में शब्दों ने जन्म ... आगे पढ़ें...