
मैं तुम्हें फिर मिलूँगीकहाँ? किस तरह? नहीं जानतीशायद तुम्हारे तख़्यिल की चिनगारी बनकरतुम्हारे कैनवस पर रहस्यमय रेखा बनकरख़ामोश तुम्हें देखती रहूँगीया शायद सूरज की किरण बनकर तुम्हारे रंगों में घुलूँगीया रंगों की बांहों में बैठकरतुम्हारे कैनवस को लिपटूँगीपता ...
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