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टैग्स: बब्बा


ब्लॉग्स (2)
कठपुतलियों का खेल कितना प्यारा लगता है | नाचती, गाती, लड़ती, झगड़ती, बात करती हुई कठपुतलियाँ उनकी डोर को थामकर रखने वालों के हाथों का तिलस्मी खेल होता है | तिलस्मी इसलिए कहा क्योंकि देखने वालों को वो हाथ दिखाई नहीं देते, जिनके द्वारा कठपुतलियों में जान आ ... आगे पढ़ें...

रोज़ रात दर्द की दहलीज़ को पार कर ख़ुशियों के आंगन में पैर रखती हूँफिर पैरों में सितारों की पायल पहनआसमान से चाँद तोड़ चखती हूँये चाँद भी बड़ा अजीब है रोज़ अलग स्वाद देता हैमैं कभी ख़ुद खा लेती हूँ कभी बच्चों के लिए रख लेती हूँमैं दौड़कर वहां पहुँचती हूँ ... आगे पढ़ें...