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अमिताभ का जवाब
रहस्यमयी रेखा (रेखा के जन्मदिन पर अमृता प्रीतम की कविता)मैंने तो कहा था-तू साथ चलती रहेऔर मैं कभी न थकूँ!मैंने यह कब कहा था-कि अपनी राह के आगे कोई घर न होपैरों तले भटकन का लंबा सफर बीच जाएएक चुंबन के छोड़ बनाने की खातिरबेगानी ओट से पनाह मांगे!मैंने तो कहा ...
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Topiwala Shaifaly
द्वारा 11 अक्टूबर, 2009 12:19 PM पर पोस्टेड
#
रहस्यमयी रेखा
मैं तुम्हें फिर मिलूँगीकहाँ? किस तरह? नहीं जानतीशायद तुम्हारे तख़्यिल की चिनगारी बनकरतुम्हारे कैनवस पर रहस्यमय रेखा बनकरख़ामोश तुम्हें देखती रहूँगीया शायद सूरज की किरण बनकर तुम्हारे रंगों में घुलूँगीया रंगों की बांहों में बैठकरतुम्हारे कैनवस को लिपटूँगीपता ...
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Topiwala Shaifaly
द्वारा 10 अक्टूबर, 2009 7:15 PM पर पोस्टेड
#
कुछ कुछ
इंतज़ार की रात बहुत अंधेरी थीलेकिन देह का दिया प्रकाशितकल हवा भी चली तो धीमे-धीमे रूह से एक आह निकलीऔर जिस्म तलबग़ार हुआकल ख़्वाहिशें निकली तो धीमे-धीमे तन्हाई का कोना दाँतों में दबाए रात कसमसाती रही ख़्वाब नींद से बचके निकले धीमे-धीमेशिकायतों का दरिया आँखों ...
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Topiwala Shaifaly
द्वारा 25 नवंबर, 2008 6:07 PM पर पोस्टेड
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