Welcome, Guest   [ Register | Sign In | Take a tour | Adult Filter: On ]

टैग्स: नायिका


ब्लॉग्स (8)
ध्यान की चर्चा इन दिनों बहुत है। कामयाबी के लिए पागल इस दुनिया में ध्यान को भी कामयाबी का एक मंत्र, एक टोटका मान लिया गया है। कुछ नकली बाबा तो दावा करते हैं कि ध्यान से आप में दुनिया को जीतने की ताकत आ जाएगी। पर क्या वाकई ध्यान कामयाबी का कोई टोटका है? ... आगे पढ़ें...

रहस्यमयी रेखा (रेखा के जन्मदिन पर अमृता प्रीतम की कविता)मैंने तो कहा था-तू साथ चलती रहेऔर मैं कभी न थकूँ!मैंने यह कब कहा था-कि अपनी राह के आगे कोई घर न होपैरों तले भटकन का लंबा सफर बीच जाएएक चुंबन के छोड़ बनाने की खातिरबेगानी ओट से पनाह मांगे!मैंने तो कहा ... आगे पढ़ें...

मैं तुम्हें फिर मिलूँगीकहाँ? किस तरह? नहीं जानतीशायद तुम्हारे तख़्यिल की चिनगारी बनकरतुम्हारे कैनवस पर रहस्यमय रेखा बनकरख़ामोश तुम्हें देखती रहूँगीया शायद सूरज की किरण बनकर तुम्हारे रंगों में घुलूँगीया रंगों की बांहों में बैठकरतुम्हारे कैनवस को लिपटूँगीपता ... आगे पढ़ें...

सोनू निगम का हृदय परिवर्तनजयप्रकाश चौकसे Wednesday, September 02, 2009 सारे भौतिक विकास में अध्यात्म जुड़ा है, क्योंकि पूरी निष्ठा से अपना काम करने वाला प्रत्येक शख्स आध्यात्मिक आनंद प्राप्त कर रहा है। भगवा कपड़ा धारण करके हिमालय जाना आवश्यक नहीं है। ... आगे पढ़ें...

कठपुतलियों का खेल कितना प्यारा लगता है | नाचती, गाती, लड़ती, झगड़ती, बात करती हुई कठपुतलियाँ उनकी डोर को थामकर रखने वालों के हाथों का तिलस्मी खेल होता है | तिलस्मी इसलिए कहा क्योंकि देखने वालों को वो हाथ दिखाई नहीं देते, जिनके द्वारा कठपुतलियों में जान आ ... आगे पढ़ें...

जॉनी डेप वह थोड़ा-सा खतरनाक है, वह रहस्यमय है, उसमें महान ऊष्मा है- ये सब चीज़ें केवल उसकी आँखों में देखी जा सकती हैं | यही उसके आकर्षण की चाबियाँ है | मैं उन बातों का पछतावा नहीं करता, जिन्हें मैंने नहीं किया और उनका भी नहीं, जिन्हें मैंने किया | आप इसे ... आगे पढ़ें...

आज फिर सुबह-सुबह पापा का सपना साथ लिए जागी हूँ| और साथ ही एक शिक़ायत-सी ज़ुबान पर आ गई, जैसे पापा से कह रही हूँ कि मेरे जन्म लेने के बाद से आज तक मुझे ऐसा कोई दिन याद नहीं आता जब मुझे आपका किसी भी काम के लिए मार्ग दर्शन मिला हो| ज़िंदगी की छोटी से छोटी और ... आगे पढ़ें...

कितना हलका-सा, हलका-सा तन हो गयाजैसे शीशे का सारा बदन हो गयागुलमोहर के-से फूलों में बिखरी हुई कहकशां के-से रास्ते पे निखरी हुई मेरी पलकों पे मोती की झालर सजीमेरे बालों ने अफ़शां (सिंदूर्) की चादर बुनी मेरे आंचल ने आँखों पे घूंघट कियामेरी पायल ने सबसे पलट ... आगे पढ़ें...