गरज-बरस प्यासी धरती पर फिर पानी दे मौला चिड़ियों को दाने, बच्चों को गुड़धानी दे मौला दो और दो का जोड़ हमेशा चार कहाँ होता है सोच-समझवालों को थोड़ी नादानी दे मौला फिर रौशन कर ज़हर का प्याला चमका नई सलीबें झूठों की दुनिया में सच को ताबानी (जगमगहट) दे मौला फिर ...
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