 ध्यान की चर्चा इन दिनों बहुत है। कामयाबी के लिए पागल इस दुनिया में ध्यान को भी कामयाबी का एक मंत्र, एक टोटका मान लिया गया है। कुछ नकली बाबा तो दावा करते हैं कि ध्यान से आप में दुनिया को जीतने की ताकत आ जाएगी। पर क्या वाकई ध्यान कामयाबी का कोई टोटका है? ... आगे पढ़ें...
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 रहस्यमयी रेखा (रेखा के जन्मदिन पर अमृता प्रीतम की कविता)मैंने तो कहा था-तू साथ चलती रहेऔर मैं कभी न थकूँ!मैंने यह कब कहा था-कि अपनी राह के आगे कोई घर न होपैरों तले भटकन का लंबा सफर बीच जाएएक चुंबन के छोड़ बनाने की खातिरबेगानी ओट से पनाह मांगे!मैंने तो कहा ... आगे पढ़ें...
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 मैं तुम्हें फिर मिलूँगीकहाँ? किस तरह? नहीं जानतीशायद तुम्हारे तख़्यिल की चिनगारी बनकरतुम्हारे कैनवस पर रहस्यमय रेखा बनकरख़ामोश तुम्हें देखती रहूँगीया शायद सूरज की किरण बनकर तुम्हारे रंगों में घुलूँगीया रंगों की बांहों में बैठकरतुम्हारे कैनवस को लिपटूँगीपता ... आगे पढ़ें...
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 सोनू निगम का हृदय परिवर्तनजयप्रकाश चौकसे Wednesday, September 02, 2009 सारे भौतिक विकास में अध्यात्म जुड़ा है, क्योंकि पूरी निष्ठा से अपना काम करने वाला प्रत्येक शख्स आध्यात्मिक आनंद प्राप्त कर रहा है। भगवा कपड़ा धारण करके हिमालय जाना आवश्यक नहीं है। ... आगे पढ़ें...
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कठपुतलियों का खेल कितना प्यारा लगता है | नाचती, गाती, लड़ती, झगड़ती, बात करती हुई कठपुतलियाँ उनकी डोर को थामकर रखने वालों के हाथों का तिलस्मी खेल होता है | तिलस्मी इसलिए कहा क्योंकि देखने वालों को वो हाथ दिखाई नहीं देते, जिनके द्वारा कठपुतलियों में जान आ ... आगे पढ़ें...
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रोज़ रात दर्द की दहलीज़ को पार कर ख़ुशियों के आंगन में पैर रखती हूँफिर पैरों में सितारों की पायल पहनआसमान से चाँद तोड़ चखती हूँये चाँद भी बड़ा अजीब है रोज़ अलग स्वाद देता हैमैं कभी ख़ुद खा लेती हूँ कभी बच्चों के लिए रख लेती हूँमैं दौड़कर वहां पहुँचती हूँ ... आगे पढ़ें...
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 जॉनी डेप वह थोड़ा-सा खतरनाक है, वह रहस्यमय है, उसमें महान ऊष्मा है- ये सब चीज़ें केवल उसकी आँखों में देखी जा सकती हैं | यही उसके आकर्षण की चाबियाँ है | मैं उन बातों का पछतावा नहीं करता, जिन्हें मैंने नहीं किया और उनका भी नहीं, जिन्हें मैंने किया | आप इसे ... आगे पढ़ें...
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 आज फिर सुबह-सुबह पापा का सपना साथ लिए जागी हूँ| और साथ ही एक शिक़ायत-सी ज़ुबान पर आ गई, जैसे पापा से कह रही हूँ कि मेरे जन्म लेने के बाद से आज तक मुझे ऐसा कोई दिन याद नहीं आता जब मुझे आपका किसी भी काम के लिए मार्ग दर्शन मिला हो| ज़िंदगी की छोटी से छोटी और ... आगे पढ़ें...
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 कितना हलका-सा, हलका-सा तन हो गयाजैसे शीशे का सारा बदन हो गयागुलमोहर के-से फूलों में बिखरी हुई कहकशां के-से रास्ते पे निखरी हुई मेरी पलकों पे मोती की झालर सजीमेरे बालों ने अफ़शां (सिंदूर्) की चादर बुनी मेरे आंचल ने आँखों पे घूंघट कियामेरी पायल ने सबसे पलट ... आगे पढ़ें...
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त्रिकोण के तीन कोण परस्पर आधारित, एक-दूसरे के सामने एक-दूसरे के होने का आभास दिलाते हैंकोई एक रेखा भी कम हुई तो एक दूसरे से दूर खो जाएँगे अनंत में कहीं खोए हुए रिश्ते की तरह आगे पढ़ें...
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गरज-बरस प्यासी धरती पर फिर पानी दे मौला चिड़ियों को दाने, बच्चों को गुड़धानी दे मौला दो और दो का जोड़ हमेशा चार कहाँ होता है सोच-समझवालों को थोड़ी नादानी दे मौला फिर रौशन कर ज़हर का प्याला चमका नई सलीबें झूठों की दुनिया में सच को ताबानी (जगमगहट) दे मौला फिर ... आगे पढ़ें...
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मस्जिदों-मन्दिरों की दुनिया में मुझको पहचानते कहाँ हैं लोग रोज़ मैं चाँद बनके आता हूँ दिन में सूरज सा जगमगाता हूँ खनखनाता हूँ माँ के गहनों में हँसता रहता हूँ छुप के बहनों में मैं ही मज़दूर के पसीने में !!!! मैं ही बरसात के महीने में मेरी तस्वीर आँख का आँसू ... आगे पढ़ें...
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 इंतज़ार की रात बहुत अंधेरी थीलेकिन देह का दिया प्रकाशितकल हवा भी चली तो धीमे-धीमे रूह से एक आह निकलीऔर जिस्म तलबग़ार हुआकल ख़्वाहिशें निकली तो धीमे-धीमे तन्हाई का कोना दाँतों में दबाए रात कसमसाती रही ख़्वाब नींद से बचके निकले धीमे-धीमेशिकायतों का दरिया आँखों ... आगे पढ़ें...
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 मैं ईश्वरमैं मनुष्य के रूप में ईश्वरमैं उस पत्थर की मूरत में ईश्वर मैं निराकार में ईश्वरमैं तुम्हारी सूरत में ईश्वर बस तुम मुझे पुकारो अपनी आँखें बंद किएइतनी श्रद्धा से, इतनी शिद्दत से कि तुम आँखें खोलो और मुँह से तुम्हारे ही, ये निकले बोलो वत्स क्यों ... आगे पढ़ें...
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मैंने कोशिश ज़रूर की मैं भीड़-सा हो जाऊँ जो अकेले नहीं कह सका उसे एक नारा बनाऊँ चार लोग कहते हैं तो सच लगता है मैं अकेला कैसे आवाज़ लगाऊँ लेकिन मैं भीड़ ना हो सका बीच में कहीं खड़ा हो गया कारवां उपर से गुजर गया मैंने बहुत कोशिश कीमैं सतही हो जाऊँ और तैरता रहूँ ... आगे पढ़ें...
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