
मैं ईश्वरमैं मनुष्य के रूप में ईश्वरमैं उस पत्थर की मूरत में ईश्वर मैं निराकार में ईश्वरमैं तुम्हारी सूरत में ईश्वर बस तुम मुझे पुकारो अपनी आँखें बंद किएइतनी श्रद्धा से, इतनी शिद्दत से कि तुम आँखें खोलो और मुँह से तुम्हारे ही, ये निकले बोलो वत्स क्यों ...
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