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चैनल: मैं


ब्लॉग्स (2)
जब सही अर्थों में लिखना शुरू किया था तब लगा था मुझे मेरे हर्फ़ों से इश्क़ हो गया है, वो शुरुआती दिनों का आकर्षण, फिर ज़माने की नज़र से बचकर नज़रें मिलाना, वो रोज़-रोज़ की मुलाकातें, ..............दिन-रा... आगे पढ़ें...

अल्हड़ उम्र की नादानियाँ समय की परतों में हमेशा के लिए दफ़न हो गई....और किसी की बातों में, किसी की आँखों में, किसी की धड़कनों में उगने लगी। किसी के लिए सिर्फ एक बैचेनी हूँ, किसी के लिए भटकन, कभी कोई आपा कहता है कोई माँ और अंततः इश्क बनकर खुद पर घमंड आ गया ... आगे पढ़ें...