
अल्हड़ उम्र की नादानियाँ समय की परतों में हमेशा के लिए दफ़न हो गई....और किसी की बातों में, किसी की आँखों में, किसी की धड़कनों में उगने लगी। किसी के लिए सिर्फ एक बैचेनी हूँ, किसी के लिए भटकन, कभी कोई आपा कहता है कोई माँ और अंततः इश्क बनकर खुद पर घमंड आ गया ...
आगे पढ़ें...