कहाँ किसी के लिए है मुमकिन सब के लिए एक सा होना, थोड़ा सा दिल मेरा बुरा है, थोड़ा भला है सीने में, दिल जिस चीज को हाँ कहता है, ज़ेहन उसी को कहता है न इश्क में उफ ये खुदी से लड़ना एक सजा है सीने में ये दुनिया ही जन्नत थी, ये दुनिया ही जन्नत है, सब कुछ खो कर आज ये हम पर भेद खुला है सीने में आवारापन बंजारापन एक ख़ला है सीने में, हर दम हर पल बेचैनी है, कौन बला है सीने में...........-सईद कादरी
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| अंतिम बार संशोधित | 18 सितंबर, 2009 1:02:00 PM IST |