मैं ईश्वर
मैं मनुष्य के रूप में ईश्वर
मैं उस पत्थर की मूरत में ईश्वर
मैं निराकार में ईश्वर
मैं तुम्हारी सूरत में ईश्वर ![]()
बस तुम मुझे पुकारो
अपनी आँखें बंद किए
इतनी श्रद्धा से, इतनी शिद्दत से
कि तुम आँखें खोलो
और मुँह से तुम्हारे ही, ये निकले
बोलो वत्स क्यों पुकारा मुझे............... ![]()
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