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अल्लाह तेरो नाम, ईश्वर तेरो नाम


मैं ईश्वर
मैं मनुष्य के रूप में ईश्वर
मैं उस पत्थर की मूरत में ईश्वर
मैं निराकार में ईश्वर
मैं तुम्हारी सूरत में ईश्वर














बस तुम मुझे पुकारो
अपनी आँखें बंद किए
इतनी श्रद्धा से, इतनी शिद्दत से
कि तुम आँखें खोलो
और मुँह से तुम्हारे ही, ये निकले
बोलो वत्स क्यों पुकारा मुझे...............





प्रतिक्रियाएँ

Re: अल्लाह तेरो नाम, ईश्वर तेरो नाम
Mind Blowing, Fabulas, beyond the relationship... thnx..
Re: अल्लाह तेरो नाम, ईश्वर तेरो नाम
कितनी भाव भरी पंक्तियाँ !!! गागर में सागर का अद्भुत उदाहरण !!! मात्र 11 पंक्तियों में ईश्वर का साक्षात्कार करवा दिया.... इससे बढ़ कर उपलब्धि और क्या होगी कि ईश्वरत्व मनुष्य में ही प्रकट हों जाये, बाहर ईश्वर को खोजने वालो पर अच्छा प्रहार किया, शायद अब कुछ लोगो की आँखें खुले
Re: अल्लाह तेरो नाम, ईश्वर तेरो नाम
बेहतरीन है, एक बार फिर नए रूप में देखकर अच्‍छा लगा, बहुत लम्‍बा अरसा हो गया था, आपको अवसाद या दुख में घिरे हुए, आपके लेखन में दिखता था आपके भीतर का हाल। शायद फिर कोई पंछी अपनी ओर आकर्षित कर ले गया आपको, एक बार पुन: जादू छा गया आपका। हमेशा खुश रहिएगा, हमारी दुआएँ आपके साथ रहेंगी।
Re: अल्लाह तेरो नाम, ईश्वर तेरो नाम
bahut din ho gae apke agle lekh ka intzaar hai....
Re: अल्लाह तेरो नाम, ईश्वर तेरो नाम
आपके ब्लॉग में शब्दों के अनूठे चित्र हैं! जीवन के विविध रंग हैं! रचते रहिये। हार्दिक शुभकामनायें और बधाई ! संध्या गुप्ता
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