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2 अक्टूबर, 2008


ब्लॉग्स (1)
मैंने कोशिश ज़रूर की मैं भीड़-सा हो जाऊँ जो अकेले नहीं कह सका उसे एक नारा बनाऊँ चार लोग कहते हैं तो सच लगता है मैं अकेला कैसे आवाज़ लगाऊँ लेकिन मैं भीड़ ना हो सका बीच में कहीं खड़ा हो गया कारवां उपर से गुजर गया मैंने बहुत कोशिश कीमैं सतही हो जाऊँ और तैरता रहूँ ... आगे पढ़ें...