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विचारों की कोई परिभाषा नहीं होती
वो तो मन के बादलों पर बैठकर
कहीं भी बरस जाते हैं,
ज्ञान की कश्ती में बैठकर भी
डूब जाते हैं,
हवा में बहते-बहते थम जाते हैं,
क्रोध को बुझाते हुए
खुद जल जाते हैं,
प्रेम को फैलाते हुए
देह में सिमट जाते हैं,
करुणा को रोकते हुए
अश्कों में बह जाते हैं
और तुझसे कुछ कहते-कहते
चुप हो जाते हैं।
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