
संशयो वाली रात में मस्तिष्क से प्रश्नों की झड़ी निकल रही थी, जिनसे वस्तु तुल्य हृदय का कोई लेना देना नहीं...वस्तु तुल्य इसलिए क्योंकि जब प्रश्न लौकिक हो तो उनका जवाब अलौकिक भाषा में देना निरर्थक प्रयास है... और वो निरर्थक प्रयास उस हृदय द्वारा ही तो हो रहे ...
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