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एक अदद आदमी एक अदद औरत


एक अदद आदमी
एक अदद औरत
बस मुझे प्रकृति रहने दो
इससे कम मुझे जिस्म नहीं होना
इससे ज्यादा मुझे रूह नहीं बनना

मुझे बनना है फिर वही हव्वा
तुममें देखना है फिर वही आदम
और चखना है फिर वही वर्जित फल
अपने गुनाहों पर शर्मसार होने
मंजूर है मुझे यदि इस गुनाह के बाद
हम प्रकृति हो जाते हैं
सिर्फ एक अदद आदमी
एक अदद औरत.....

हाँ इसे ही तो कहते है न
पिछले जन्मों के धागे पकड़ना
कि मुझे अब भी याद है
उस वर्जित बाग की कहानी
जब तुम हुआ करते थे आदम
और मैं हुआ करती थी हव्वा
बस एक अदद आदमी
एक अदद औरत....













हम ही तो है जो बचाएँगे पृथ्वी को
प्रलय के क्षणों में
जब कोई नहीं बचेगा
और हम दो रह जाएँगे
बस एक अदद आदमी
एक अदद औरत
और जीवन की निरंतरता.....

प्रतिक्रियाएँ

Re: एक अदद आदमी एक अदद औरत
ईश्वर ने जब आदम और ह्व्वा को वर्जित फल खाने को मना किया तो ऐबल (शैतान के दूत) ने उन्हे उसे खाने को उकसा दिया और बेचारे आदमी और औरत अब तक ऐबल के बताए रास्ते पर ही 'अदद' बनने को भटक रहे है... सबसे पहले इंसान बनना होगा तब जा कर अदद आदमी या औरत बना सकते है,
Re: एक अदद आदमी एक अदद औरत
खूब पकड़ती हैं आप रिश्तों की डोर को....ये बिलकुल सच है कि सारी सृष्टि के पीछे आधार यही मूलभूत बंधन है... और हाँ, बच्चों के साहित्य पर लिखने की बात अधूरी है आपकी अभी
Re: एक अदद आदमी एक अदद औरत
कहां थे इतने दिनो से.....
Re: एक अदद आदमी एक अदद औरत
सब तो पता है तुम्हें...... जादू....
अस्वीकरण