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19 अगस्त, 2008


ब्लॉग्स (1)
एक अदद आदमीएक अदद औरत बस मुझे प्रकृति रहने दो इससे कम मुझे जिस्म नहीं होनाइससे ज्यादा मुझे रूह नहीं बनना मुझे बनना है फिर वही हव्वा तुममें देखना है फिर वही आदम और चखना है फिर वही वर्जित फल अपने गुनाहों पर शर्मसार होने मंजूर है मुझे यदि इस गुनाह के बादहम ... आगे पढ़ें...