
मैं अब भी बैठा हूँ खामोश तुम्हारी साँसों को लबों पर सजाएलोग कहने लगे हैं कि मैं आँखों से बहुत बोलने लगा हूँ आ जाओ और ले जाओ उसे वापस मेरी बातों को छूए बिनाइससे पहले कि लोगों के सवालों का लबों से जवाब न दे सकूँ....मैं चाहती थी कि तुम देख सको मेरी आँखों से ...
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