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अगस्त 2008


ब्लॉग्स (7)
विचारों की कोई परिभाषा नहीं होती वो तो मन के बादलों पर बैठकर कहीं भी बरस जाते हैं, ज्ञान की कश्ती में बैठकर भीडूब जाते हैं,हवा में बहते-बहते थम जाते हैं, क्रोध को बुझाते हुए खुद जल जाते हैं, प्रेम को फैलाते हुए देह में सिमट जाते हैं, करुणा को रोकते हुए ... आगे पढ़ें...

संशयो वाली रात में मस्तिष्क से प्रश्नों की झड़ी निकल रही थी, जिनसे वस्तु तुल्य हृदय का कोई लेना देना नहीं...वस्तु तुल्य इसलिए क्योंकि जब प्रश्न लौकिक हो तो उनका जवाब अलौकिक भाषा में देना निरर्थक प्रयास है... और वो निरर्थक प्रयास उस हृदय द्वारा ही तो हो रहे ... आगे पढ़ें...

एक अदद आदमीएक अदद औरत बस मुझे प्रकृति रहने दो इससे कम मुझे जिस्म नहीं होनाइससे ज्यादा मुझे रूह नहीं बनना मुझे बनना है फिर वही हव्वा तुममें देखना है फिर वही आदम और चखना है फिर वही वर्जित फल अपने गुनाहों पर शर्मसार होने मंजूर है मुझे यदि इस गुनाह के बादहम ... आगे पढ़ें...