
विचारों की कोई परिभाषा नहीं होती वो तो मन के बादलों पर बैठकर कहीं भी बरस जाते हैं, ज्ञान की कश्ती में बैठकर भीडूब जाते हैं,हवा में बहते-बहते थम जाते हैं, क्रोध को बुझाते हुए खुद जल जाते हैं, प्रेम को फैलाते हुए देह में सिमट जाते हैं, करुणा को रोकते हुए ...
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