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28 जुलाई, 2008


ब्लॉग्स (2)
मेरे सपने मुझे सोने नहीं देते कभी रात की चादर पर पड़ी सलवटों से चुभते हैं तो कभी दिन के आसमां से जलती धूप से बरसते हैंमैं अकसर रातों में उठकरउन सलवटों को हटाता हूँ और भरी दोपहर काला चश्मा पहनकर निकलता हूँ। यदि रात एक करवट में निकाल भी लूँ तो पीठ का दर्द ... आगे पढ़ें...

वो खामोशी की अंधेरी गलियाँ जहाँ दोचार शब्दों के दीये राह दिखाने के लिए रख दिए गए हैं वहीं से गुज़र रहा हूँ .... कई ख़ुफ़िया दरवाज़े विचारों की मानिंदराह में मिल जाते हैं कुछ रोशनी की झालर सजाएआकर्षित करते हैं कुछ रहस्यमयी किले के बड़े से दरवाज़ों की तरह चुप्प ... आगे पढ़ें...