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22 जुलाई, 2008


ब्लॉग्स (1)
मैं निश्चिंत हूँ चिंतित नहींजो थम गया-सा लगता है वो थमा नहीं है, क्योंकि धरा को किसी ने धुरी पर घूमते नहीं देखा है, उम्र को बढ़ते और झुर्रियों को चेहरे पर चढ़ते नहीं देखा है। आज जो थमे हुए से लगते हैं तो वो एक परिक्रमा को पूरा करने का ग़ुरूर है। अपनी ही धुरी ... आगे पढ़ें...