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18 जुलाई, 2008


ब्लॉग्स (4)
सूफ़ी गीत और माँ का कोई रिश्ता होता है क्या मुझे नहीं पता लेकिन आज पता नहीं क्यों आबिदा परवीन को सुनते हुए मैंने सूफ़िज़्म को माँ की ममता से जोड़ लिया....शायद ये मेरी ज़रुरत थी। पीड़ा के दिनों में माँ का आँचल याद आता है और जब वो आँचल कहीं नहीं मिलता तो दिल की ... आगे पढ़ें...

तुझसे मिलने से पहलेज़िंदगी एक तलाश थी, जैसे एक जिस्म की चाह होकिसी भटकती रूह को। तुझसे मिलने से पहले ज़िंदगी एक तलाश थी जैसे एक रूह की चाह हो किसी खाली जिस्म को। तुझसे मिलने के बाद रूह रिहा हो गई है जिस्म के दायरे से तुझसे मिलने के बाद ज़िंदगी बच गई है ... आगे पढ़ें...

जीवन एक मंथन सा हो चला हैजहाँ से पहले विष ही निकलता हैअमृत निकलने का विश्वास भी हैप्रतीक्षा है तो उस प्रभु कीजो फिर मोहिनी के रूप मेंअंदर के राक्षस को विष पिला देऔर अंदर के देवता को अमरता का वरदान मिले...... चिंता है तो बस इस बात कीकि क़िस्मत के राहू केतु ... आगे पढ़ें...