Welcome, Guest   [ Register | Sign In | Take a tour | Adult Filter: On ]

17 जुलाई, 2008


ब्लॉग्स (2)
लोग अकसर मुझसे पूछ्ते हैं कि आपके पुराने ब्लॉग में ओशो के लिए एक अलग से चैनल हुआ करता था वैसा ही नए में क्यों नहीं है? आपका पहला ब्लॉग प्रेम, आध्यात्म और ओशो से लबालब हुआ करता था अब क्या हुआ? अब क्यों आपके ब्लॉग में अभिमान और कुण्ठा जैसी वस्तुएँ दिखने लगी ... आगे पढ़ें...

तू सुगन्ध है सुगन्ध किसी की मल्कियत नहीं हुआ करती तू मेरी मल्कियत नहीं। सुगन्ध अहसास के लिए है बाज़ुओं में उसकी कल्पना धोखा है अपने आप से धोखे में जीना खुद को क़त्ल करना है मैंने ख़ुद को क़त्ल किया है। मैंने हर पल कमज़ोरियों का ज़हर पिया है। हर सोच में तू मेरी ... आगे पढ़ें...