
मौन जब मुखर हो जाता हैतो झरने लगता है आँखों की किलकारियों से साँसों की जुम्बिश से....... या उफन जाता है दूध में आए उबाल की तरहरसोई में ढेर सारे कामों के बीचएक और काम बढ़ाता हुआ........ या बजने लगता है गर्म तवे पर झन्नाटेदार पानी की बूँदों की तरह बावजूद ...
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