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11 जुलाई, 2008


ब्लॉग्स (1)
नफ़रत बहुत दिनों तक नहीं रहती, लेकिन जितनी देर रहती है, फफोलों की तरह उभर आती है कविताओं से कहानियों से और रिसती रहती है ताज़े घावों की तरह......नफ़रत समय के साथ सूख जाती है, लेकिन कुछ निशान छोड़ जाती है, छिले हुए घुटनों पर या बचपन में माथे पर लगी किसी चोट की ... आगे पढ़ें...