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मैं तुमसे हूँ -2










जब सही अर्थों में लिखना शुरू किया था तब लगा था मुझे मेरे हर्फ़ों से इश्क़ हो गया है, वो शुरुआती दिनों का आकर्षण, फिर ज़माने की नज़र से बचकर नज़रें मिलाना, वो रोज़-रोज़ की मुलाकातें, ..............दिन-रात प्रेम में सराबोर रहना किसे अच्छा नहीं लगता। कभी मेरे हर्फ़ मुझसे रूठ भी जाते तो मैं उन्हें प्यार से मना लेती थी। फिर घरवालों के साथ झगड़ा करके उनके साथ प्रणय सूत्र में बंधी। शब्दों को बच्चों की तरह अपने गर्भ में पाला, प्रसव पीड़ा से गुजरते हुए उन्हें जन्म दिया....एक नितांत सुकून........

शब्दों की अठखेलियाँ और उनकी मस्ती के बीच कब वो बड़े हो गए और मेरा वजूद छोटा होता चला गया पता ही नहीं चला..... माँ के लिए सबसे खुशी का पल होता है जब उसे उसके बच्चों के नाम से लोग जानने लगें.... मेरी पहचान मेरे शब्दों से होने लगी.......
मैं खुश थी, इसमें ही खुश थी..............फिर पता नहीं क्या हुआ, एक एक करके मेरे शब्दों ने मुझसे बात करना बंद कर दिया, मुझसे दूर होने लगे..............वो रूठ गए हैं??

सब कहते हैं जब कोई मुझसे रूठ जाता है, तो मुझे मनाना बहुत अच्छे से आता है। आज मेरे शब्द मुझसे रूठ गए हैं....लेकिन इस बार मुझे उन्हें मनाना नहीं आ रहा........शायद मेरा अहम आड़े आ रहा है कि मैं ही क्यों हर बार मनाऊँ....इस बार उन्हें आना पड़ेगा लौटकर मेरे पास..............

जीवन में पहली बार ऐसा नहीं हुआ कि मेरी कलम मेरे हाथो से छूट गई, लेकिन इस बार ऐसे मोड़ पर आकर साथ छूटा है, जहाँ चारो ओर से लोगों की नज़रें मुझे घूर रही है। जैसे कह रहे हो तुझे तो बड़ा घमंड था अपने शब्दों पर, आज कहाँ है वे शब्द???
कहाँ तुम...कहाँ हो?????


प्रतिक्रियाएँ

Re: मैं तुमसे हूँ -2
वो कहते है उन्‍हें उनके शब्‍दों से प्‍यार था जो उनसे रूठ कर बैठे है, एक हम थे जो आज तक कहे उनके हर शब्‍द को खुदा समझते रहें!! कहते है ना जब गुस्‍सा सारी सीमा तोड़ जाता है तो ऐसे शब्‍द जन्‍म ले लेते है जिन्‍हें दिल सुनना नहीं चाहता, आपके साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ है, किसी के कह देने भर से सब कुछ खत्‍म नहीं होता कभी।। कलम का क्‍या है जब हाथ थक जाते है तो कुछ देर बस आराम करने लग जाती है, इसमें ये कहना कि शब्‍द नहीं है इसका मतलब हुआ आपको किसी से प्रेम नहीं है। कोई हमारी जिंदगी को ऐसे मोड़ पर लाकर कैसे खड़ा कर सकता है जहां हमारी ताकत हमारा साथ छोड़ दें? आपके शब्‍दों में अब भी वहीं जादू है, बस अपने दिल पर दुनिया की छोटी-छोटी बातों को हावी न होने दें!
Re: मैं तुमसे हूँ -2
में अभी ब्लॉग पर आया नया नया परिंदा हूँ ,जिसने पहले पहल आपको पड़ा ,कोशिश की कुछ बहुत समझने की ,आपकी बातें इतिहास हैं आपका ,युन तो हम सभी का होता हैं एक अतीत , पर कुछ हि हैं जो जी पाते हैं हर पल को चाहे दर्द जिया हो या सूख भोगा हो ,आपने सच्चा जीवन जिया हैं ...............एतबार हैं आपके शब्द आपको माना लेंगे ..................
Re: मैं तुमसे हूँ -2
आपका प्रयास सराहनीय है. बहुत-बहुत बधाई. एक बार पुन डेरों शुभकामनाये ......................
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