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9 जुलाई, 2008


ब्लॉग्स (2)
कोई है जो मेरे शब्दों में अपना वजूद ढूँढता है, मेरे कहे हुए शब्दों को सहेजकर रखता है, मेरी खामोशी के मौसम में झड़ गए शब्दों को आँखों का पानी देकर हमेशा हरा रखता है..... कोई है जो मुझेमेरे जैसा बने रहने देता है और खुद मुझ में ढलकर मेरे वजूद को बड़ा कर देता ... आगे पढ़ें...

जब सही अर्थों में लिखना शुरू किया था तब लगा था मुझे मेरे हर्फ़ों से इश्क़ हो गया है, वो शुरुआती दिनों का आकर्षण, फिर ज़माने की नज़र से बचकर नज़रें मिलाना, वो रोज़-रोज़ की मुलाकातें, ..............दिन-रा... आगे पढ़ें...