एक लम्बे कठिन सफर के बाद समय आज फिर वहीं खड़ा है हाथ बाँधे, गंभीर मुद्रा में, बीच-बीच में मन के खाली कमरे में चहल कदमी करता हुआ.....और ज़िंदगी घुटनों में सिर झुकाए बैठी है....सिर्फ चंद पलों के लिए.....जब तक माथे पर हताशा की सलवटें हैं, क्योंकि कहीं सुना है ...
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