Welcome, Guest   [ Register | Sign In | Take a tour | Adult Filter: On ]

8 जुलाई, 2008


ब्लॉग्स (2)
एक लम्बे कठिन सफर के बाद समय आज फिर वहीं खड़ा है हाथ बाँधे, गंभीर मुद्रा में, बीच-बीच में मन के खाली कमरे में चहल कदमी करता हुआ.....और ज़िंदगी घुटनों में सिर झुकाए बैठी है....सिर्फ चंद पलों के लिए.....जब तक माथे पर हताशा की सलवटें हैं, क्योंकि कहीं सुना है ... आगे पढ़ें...

ये समीक्षा नहीं है, सचमुच समीक्षा नहीं है। समीक्षा तो पुस्तक की होती है, जीवित गाथाओं की नहीं। अच्छा बुरा पहलू तो लिखे हुए हर्फ़ों का देखा जाता है, उन हर्फ़ों का नहीं, जो रूह बनकर गाथाओं के शरीर में बसते हों। कुछ हर्फ़ आँखों से गुज़र कर चेतना बन कर हमारे ... आगे पढ़ें...